हॉर्मोनल बदलाव भी है वजह

हॉर्मोनल बदलाव भी है वजह

हॉर्मोनल बदलाव भी है वजह
Mar 04
16:162018
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अब्स्ट्रक्टिव स्लीप एप्निया (ओएसए) की समस्या यूं तो बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को हो सकती है, लेकिन मेनोपॉज के दौरान स्त्रियों में इसके लक्षण अधिक परेशानी पैदा करते हैं। इसका कारण हैं हॉर्मोनल असंतुलन। मेनोपॉजके दौरान स्त्रियों को कई तरह के शारीरिक-मनोवैज्ञानिक बदलावों से गुजरना पड़ता है। इसके कारण बेचैनी, स्लीप एप्निया, घबराहट, हॉट फ्लैशेज (अत्यधिक गर्मी या सर्दी महसूस होना, चेहरा लाल होना, पसीना आना) जैसी समस्याएं होने लगती हैं।

अचानक रात में नींद खुलती है और दिन भर थकान महसूस होती है। ऐसा एस्ट्रोजन का स्तर घटने से होता है। हॉट फ्लैशेजकी समस्या लगभग तीन वर्ष तक रह सकती है। हालांकि कुछ स्त्रियों को यह समस्या पांच साल तक भी सताती है। मेनोपॉजके बाद स्त्रियों में स्लीप डिसॉर्डर अधिक दिखता है। रात में कई बार नींद खुलती है। लगभग 60 प्रतिशत स्त्रियों को स्लीप एप्निया की शिकायत हो सकती है।बीमारी के लक्षण
इन्सोम्निया में नींद नहीं आती और रात करवटें बदलते गुजर जाती है, जबकि स्लीप एप्निया में नींद आती तो है, मगर रात में झटके से कई-कई बार खुलती है। अब्स्ट्रक्टिव स्लीप एप्निया में मरीजसांस लेने में परेशानी का अनुभव करता है, जिससे रात में उसकी नींद खुलती रहती है। सुबह जागने पर ताजगी महसूस नहीं होती और दिन भर थकान महसूस होती है।

ओएसए के खास लक्षण हैं-
खर्राटे लेना, नींद डिस्टर्ब होना और करवट बदलते रहना
दम घुटने का एहसास होना, सोते-सोते झटके से उठ जाना और सांस लेने में परेशानी
गला चोक होना, गला सूखना या खराश महसूस होना
रात में मुंह सूखना
दांत किटकिटाना, भींचना या पीसना
बार-बार यूरिनेशन महसूस होना
दिन भर झपकी आना, काम करते हुए सो जाना।
एकाग्रता में कमी आना, चिड़चिड़ाहट और डिप्रेशन
सुबह उठने पर सिर दर्द या सिर में भारीपन का एहसास
बच्चों में इसके लक्षण बिस्तर गीला करने, पसीना आने, लर्र्निंग और बिहेवियरल डिसॉर्डर, खर्राटे, दांत पीसने और अजीब पॉजिशन में सोने के रूप में दिखाई देते हैं।